हे ईश्वर कहाँ हो

 

आपकी रचित सुंदरसी

यह माया नगरी

कितनी मायावी

हो गई है

 

सिर्फ एक नज़र

कभी फुरसतसे ज़रा

पलटके देखो

बेबस बेजान लोग

 

साँसे है जब तक

वे ज़िन्दा मगर

सुख चैनका

जीवन नसीब नहीं

 

लालची सौदागरोने

ऐसे खेल खेले की

कर दी जिंदगी सस्ती

और मौत महँगी

 

यहाँ नियम अन्याय

सहे भले सदाचारी

और मौजसे रहे

बेइमान दुराचारी

  

पता नहीं यहाँ

कौन अपना और

किसे कहे पराया

जब तनिक स्वार्थ हो

 

हमारी पुकार सुनके

बदल दो ये

बिगडी दुनिया

हे ईश्वर कहाँ हो

 

Music now Playing :-

"where have all of those good days gone"

Composed & Played by John Torp

http://www.johntorpmusic.se

Used with permission

Background by John Torp

 

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