
काश ऐसा होता
ऐ ज़िंन्दगी तुम इस तरह
ना जाने क्युं बेशक बेरहम
पर काश कभी तो मेहरबान
होकर पल भर साथ देती
लगती हो कुछ ख़फा ख़फा
यूं हमसे मुँह फेर लेके
पर काश खता बतलानेकि
कृपा तो मुनासिब सोचती
माना कि बहुत शक्तिमान हो
जो जब चाहो कर सको
पर काश उस प्रभावसे हमें
उम्रभर दारुण सज़ा ना देती
खैर जो भी हो आपकी खुशी
चुपचाप सहेना ही होगा
पर काश आपकी ये बेरुखी
हमें ज़िन्दा मौत ना देती
शायद एक दिन ऎसा आयेगा
जब कभी पलटके देखोगी
पर काश बहुत देर दिखेगी
चाहे चहो प्रसन्न करना
कुछ भी करने लाचार होगी
पश्चात हमारे अनंत प्रयाण
Music now Playing "Are you here to stay"
Composed & Played by John Torp
Used with Permission
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