मुकाबला

 

एक दिन

तुच्छ निर्बल भक्तका

शक्तिमान ईश्वरके साथ

 मुकाबला हो गया

 

लक्ष्य पानेकी लगन

और संकल्प किये

मंजिल पानेकी धुनमें

अथाह प्रयत्नवान था

 

अनजान से रास्ते

हर डगर कंटक भरे

पलमें नयी चुनौती

और सामना दुर्दैवसे

 

लेकिन कुछ भी हो

दुःसह दुःख हो

या कठिन समय

सर्वदा सताता हो

 

यह राही अटल था

सहनशील चितवन

ना कोई शिकायत

ना नज़र निराशा

 

अजब था आत्मबल

गज़ब देव आस्था

भक्तके हाल देखके

ब्रहमांड हिलने लगा

 

प्रभु हैरान होकर

गहन सोचमें घिरे

विधातासे विमर्श किया

लेकिन हल न दिखा

 

फिर भी दुर्भागी भक्तकी

भक्ति और श्रद्धाके खातिर

नियतिके नियम बदलके

दिली ख्वाहिश पूर्ण की

 

इस तरह आखिरमें

प्रभुकी असीम कृपाने

मुकाबलेका अंत किया

 

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