ऐ जिंदगी बता

 

ऐ जिंदगी कुछ तो बता

क्यों रहेती है हमसे सदा

कुछ नाराज और ख़फा

जबकी मानुं जरूर जाने

 

मैंने हमेशा कुछ किया

भला सबका जो भरोसा

पर कभी न कोई स्वार्थ

या लाभ पानेकी मनसा

 

हालाँकि कटु सच मालूम

अकसर इच्छित मतलब

निकलते लोग सहजमें

सुखकर सहाय बिसारे

 

पर जरा भी ना परवाह

मनमें मात्र एक विचार

निज जन्म तो सबकी

सेवा सुख-शांति खातिर

 

सो किसिसे कोइ गिला

या उम्मीद कदापि नहीं

लेकिन अगर हक हो तो

आपसे एक ही बात पुछुं

 

क्या कसूर है मेरा ताकि

कभी न मुझसे खुश हुई

काश कहे दो जो कारण

इस जगसे बिदाई पहेले

 

अरे अब अचानक कैसे

मेरी पुकार जैसे सुन ली

आश्चर्य अहो भाग्य मेरे

कुछ खुशीके पल दिखाये

 

जिस थोडेसे लम्होंने भी

हरेक रंजिश शिकायतको

किसि भवका लेखाजोखा

सोच प्रेरित मिटा दिया