
इंतज़ार और सही
भाग्य शायद ही किसी पर
बहुत मेहरबान होकर
मानो पलक झपकते
हर जो आशा भरता है
किसीको कभी भी कोई
इल्म नहीं हो सकता
विधाता कब कितनी
इल्तिजा सुने ना सुने
सो मनुष्यके पास सिर्फ
एक ही उपाय रहेता है
जन्मसे आखरी सॉस तक
ख्वाहिश पूर्तिकी राह देखे
कभी अपनी स्वप्न सिद्धि
या अपनोंकी खुशीके लिये
चाहे छोटीसी ईच्छा हो
के फिर बडी मनसा हो
पूरी जिंदगी हर पल वो
तमाम कोशिशके बाद भी
निर्धारित सफलता पाने
अविरत प्रतीक्षामें ही रहे
इस तरह तरसते संभलते
किस्मतसे मात खाते खाते
एक दिन उसकी जीवन नैयाको
किनारे लगनेका समय दिखे
भाग्यशाली होनेकी चाहमें
दिलमें अनेक उम्मीद लिये
जैसे तैसे आयुष्य बिताया
पर इंतज़ार खतम न हुवा
ऐसे ज़िन्दगी अंतिम मुकाम पहुँची
और जान जिस्मसे जाने लगी
तब भी दिलमें विश्वाससे सोचा
अगले भवमें इच्छित जीवन होगा
इंतज़ार और सही
Music now Playing "Someday"
Composed & Played by John Torp
Used with permission
Background "dblue170.gif" taken from
Page views
.