इतना ना झुको

 

माना कि झुकनेसे कभी

कोई छोटा नहीं होता है

और असलमें बिना कहे

निज बडप्पन जताते है

 

एवं बेतुक विवाद ज़िद

मिटानेकी यह कोशिश

उलझे रिश्ते सुलह करे

ताकि शांतिसे जी सके

 

पर ऐसा उदार मनकी

कोई हद होनी चाहिये

क्यों की अकसर लोग

इच्छित अर्थ चेष्टा करे

 

सरल व्यक्तिको नादान

और मूर्ख भावुक सोच

अवहेलना की जाती है

मानो कोई हस्ती नहीं

 

उसे नासमझ कमजोर

मानके जोरजोल्म करे

सो धौंस दिखाकर वह

निज हुकुम चला सके

 

भावनामें सहेनेवालोंकी

जगमें कोई क़दर नहीं

आत्मीय आदर मरजी

मान हक भी छिन ले

 

यह रीतिनीति नियम

प्रत्येक जगह समान

चाहे घरके अपने हो

या कोई पराये लोग

 

तब अगर विरोध करे

तो भी विफल ही रहे

क्योंकि एक अरसेकी

उपेक्षा आदत जड रहे

 

सो उस वक्तका दुःख

व्यथासे बचना चाहो

तो बस इतना झुको

कि स्वमान तो रक्षो

 

 

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