ख्वाहिश

 

ख्वाहिशें हो जीतनी जैसी

जब हो जाय बहुत गहरी

उमड उठे उद्वेग उपाधि

तडपे पलपल नाउम्मेदी

 

ऐसेमें नहीं सोचे समझे

बेबस बेचैन बावला बने

भटके यहां वहां कहां ये

परेशान अब क्या करें

 

ताकि प्रभु खुश होकर

कोई चमत्कार मेहरसे

निज आतुर अभिलाषा

पूरी करनेकी कृपा करे

 

लेकिन इस दुनियांमें

क्वचित ही ऐसा हो

हकीकत बेहद दुःखद

ज्यादा लोग मजबूर

 

अपूर्ण ठगारी कामना

स्वप्नमें सदैव जीये

और एक दिन योंही

हायहाय करते बिदा

 

ख्वाहिशें करना-जीना

साकार देखनेकी कोशिश

और इंतजार स्वाभाविक

मनुष्य जीवनक्रम है

 

पर आरजू फलीभूत हो

ना हो या कितनी मात्रा

अपनी किस्मत आधीन

मानके व्यर्थ दुःख बचें