कुछ भी कायम नहि

 

प्रकृतिका मानो सनातन नियम

हम कितना भी चहे या कर ले

हर कोशिश विफल ही बनी रहे

जब समयका साथ नसीब नहि

 

लेकिन निराश निरुत्साही क्यों

जो मुसीबतमें कमज़ोर कर दे

जबकि शांत चित देखे नियति

और मुमकिन उपाय करते रहे

 

कसूर किसका भी हो क्या करें

जाने-अनजानेमे निजका संभवे

या कोई अपनोंकी स्वार्थी चाल

पर अंजाम तो भुगतना ही पडे

 

कभी किसीके कोई दोष बिना

जो होता है या नहीं हो पाता

उस पे किसीका बस ना चले

सो दुर्भाग्य मान झेलना पडे

 

लेकिन एक बात तय ही है

दिन अच्छे हो या बेहद बुरे

विधाता निर्धारित कालचक्र

उसे जरूर बदल ही देता है

 

चाहे दुःखके घने बादल हो

या पतझडसा सूना जीवन

कि सौभाग्यसे सुहाने दिन

जैसे वसंतसा सुखद समय

 

कुछ भी यहां कायम नहीं

सो समझदारी हम अपना

मानसिक संतुलन रखकर

योग्य वक्तका इंतज़ार करे

 

 

Music now Playing "And so what if life is not easy"

Composed & Played by John Torp

 

http://www.johntorpmusic.se/

 

Used with permission

 

Background by John Torp

 

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http://www.kiranarts.org/

 

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