क्योंकर झटक दिया

 

पता नहीं न जाने क्यों

पलमें कहींसे तूफान आया

ना तनिक भी अंदेशा था

ना कुछ संयोग संकेत था

 

समझनेकी सब कोशिश

नाकाम लगने लगी

और उम्मीदका दामन जैसे

आँख चुराके छटक गया

 

शायद भाग्य खफा था

सो बेहद परेशन करके

दिलको तरसाने लगा

और मनको भरमाने लगा

 

माना कि मानव मरजीका

इस जगमें कोई मोल नहीं

या शिकायत करनेका हक नहीं

लेकिन मेहर मनसा अटूट थी

 

नसीबके खेल कोई कैसे जाने

कभी भी नाराज़ होकर

झपट झटकके झाड दें

और लाचार मानवको निराश करें

 

 

Music now playing "Blind Date"

Composed & Played by John Torp

http://www.johntorpmusic.se

Used with permission

 

Background by John Torp

 

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