निज स्थान स्पर्धा

 

मानव मन कितना अजीब

इच्छित स्थान पाने

भरसक शक्य कोशिश करे

चाहे योग्य या अनुचित हो

 

ना जाने अंजाम क्या

जो सिर्फ समय बतलाये

सफलताकी खुशी या

असमर्थ अरमान देखे

 

मानो मनचाहा स्थान

और मानद मान पाया

तो भी बहुत त्वरित

मन नाहक परेशान

 

कभी स्थान खोनेका डर

या अधिक पानेकी चाह

अथवा दूसरोंके प्रति

जलन द्वेष प्रतिस्पर्धा

 

एक ज लालची खयाल

जो कुछ भी मेरा है

या मुझे नहिं मिला है

ऐसा हक दूसरेको क्यों

 

मेरी बराबरी या उच्च

स्थान अगर पहुंचे है

तो नक्की कुछ प्रपंच

जो बरदास्त न करेंगे

 

ऐसी निरर्थक सोचमें

जो भाग्यसे मिला है

उसका आनंद गँवादे

और तब नसीब कोसे

 

पर काश शांत चित

जीवन सच समझते

यहाँ हम विधि लेख

मुताबिक ही पाये-खोये

 

सो कोई भी किसिका

कुछ कैसे छीन सके

जबकि इस जगतमें

सिर्फ दैव सर्वोपरि है

 

इसलिये मित्र मेरे

व्यर्थकी चिंता छोडके

निज भाग्यके साथ

संतोषी जीना अच्छा

 

 

Music now Playing "Daydream"

 

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