

फरियाद लबपे ना आने दे
माना कि बडा कठीन होता है
हमेशा बरदास्त करो अन्याय
फिर भी ना कोई सवाल करो
और नाराज़गी दुःख छिपा लो
लेकिन ये संघर्षसे भला कैसे
बच सको ये ना समझ पावो
कभी दिल चहे शिकायत करे
जब भी हितैषी दिलेहाल पूछे
पर मन फौरन मना फरमाये
और निज लाचार घुटन हाय
हैरानी निगलना बेहतर सोच
अनुचित बात सिफतसे टाले
कोई किसे किसकी फरियाद
कितनी कहेकर सांत्वना ढूंढे
यह जटिल प्रश्न सदा सताये
न जाने कौन क्युं बेवफा हो
मानव मनका विश्वास खता
जो वक्तके साथ बदलता रहे
सो खास महत्व खयाल भी
दूसरे लक्ष्यकी ओर चल पडे
ऐसे भी हर किसीको हक है
निज जीवन अपनी मरजीसे
जीनेकी शक्य कोशिशमें रहे
हालाँकि संबंधी नाराज़ दिखे
सुखचैनसे अगर जीना चाहो
किसीसे भी न कोई उम्मीद
या कोई गिला-शिकायत हो
भले निर्धार नसीब संताप दे
जो कुछ जब हो गया होगा
हो रहा हो और होनेवाला है
एवं जो दुर्दैव अहित दोषी है
वो तो विधि विधान होनी है
सो सबरसे बुरे दिन सहे लो
तो किस्मत-चक्र पलटने पर
निज भाग्यकी खुशी मिलेगी
जिसे कोई भी छीन ना सके
Music now Playing "The inner"
Background by John Torp
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