

सिर्फ दो मीठे बोल
कोई बात नहीं अगर हम
कभी किसी प्रकारसे नहीं
दे सके थोडीसी भी मदद
जब अपना हो या पराया
क्यों कि विधाताका खेल
ऐसा हो कि हालत हानि
रोक पाना बसमें न लगे
या कोई मज़बूरीसे बेबस
सो किसके भी मामलेसे
दूर रहेना बेहतर मानके
निज भाग भोगना छोड
स्व जीवनमें व्यस्त हुवे
यह मानव सहज वर्ताव
माना कि गलत नहि है
फिर भी अगर चाहो तो
दो मीठे बोल कहे सको
जो शायद दुःखी मनको
दवा रूप संजीवन शांति
और सांत्वना धीरज भी
दे कर सहनशील बनाये
तदुपरांत अगर उस वक्त
कोई सूझ सूचना सुझाव
देना संभव हो तो उससे
नयी दिशा आशा जगाये
जो सच साबित हो जाय
तभी उससे प्राप्य संतोष
एवं दिल ही दिल में हो
किसीको खुश देख खुशी
काश हम पल भर सोचे
तो ऐसा सुहाना सुखकर
समय कोई भी पा सके
न खर्च या खास हैरानी
सिर्फ जरूरत सदा सुनो
दिखो एक हमदर्द साथी
या चुप ही रहकर कभी
कटु वचन घाव नहीं दो
यह बात तो साफ ही है
जो भी निज पसंद चाह
भले है मरजी अधिकार
तोभी मीठी वाणी प्रण ले
Music now Playing "If"
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