स्वप्न स्वभाव टूट जाये

 

मनवा कितना नादान है तू

जो हरदम सपने सजाता है

कभी निज मनसा भरने तो

कभी अपनोंकी खुशी सोचके

 

चल चलते वे सुहाने सफरपे

न देखे कोई डगर कठिनसे

न पाये कोई बंधन विपतके

पहुँचे पलमें मनचही मंज़िले

 

कितने प्यारे-न्यारे लगते है

जबतक पलकोंमे सजे रहते

दिल चाहे ये समाँ बना रहे

और वैसा भाग्य सचमें मिले

 

पर न जाने क्यों भूल जाते

सपने तो सिर्फ सपने ही है

जितने सुखकारी है निरखने

इतने दुःखकारी विलीन पाते

 

उसका सुंदर रुप मोहक लगे

पर है काच जैसे बड़े नाजुक

कभी भी वे टूटनेका डर रहे

जो आशाको निराशामें बदले

 

भले सब सपने सच नहीं हो

और कटु हक़ीकत सामने हो

परंतु वही जीवन उद्देश दिये

जो दिलमें अनोखा जोश भरे

 

ना रहे तो जीवन करे बेजान

और जीना हरपल दुष्कर बने

सो स्वीकार है स्वभाव टूटना

चाहे पलभर ही दिल बहेलाये

 

ऐ सपनें आप हमें अच्छे लगे

 

Music now Playing:-

"Dreams are such a magic place"

Composed & Played by John Torp

http://www.johntorpmusic.se

Used with Permission

 

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