तुम बिन कैसे जीये

 

जब भी कोई अपना प्यारा

कुछ समय कोई भी कारण

बिछडने मज़बूर जाने तोभी

सवाल तुम बिन कैसे जीये

 

इसका जवाब कोई क्या दें

सो चुपचाप चल देते दिखे

बादमें दोनों नित्य कार्यमें

व्यस्त लेकिन उम्मीद करे

 

कभी तो भाग्य मेहरबानी

नीयत जरूरी काम सफल

तब खुशहाल लौटके आये

  और मिलके राह अंत करे  

 

पर कोई न जाने क्या हो

गैबी नियतिका क्रूर लेखा

जब ही अचानक खुलासा

सभी मनसा करे निराशा

 

समझ न आये क्या करें

जो अपने लौटना न चहे

पसंद नयी संगत आदत

बसे निज अलग दुनिया

 

लेकिन कुछ समय बाद

स्थिति समाधान मनसे

बदले संजोग सहनशील

निज जीवन जीना शुरु

 

किंतु बात बेहद कठीन

जब जाने कोई अपना

या अपनासा ये जगसे

आकस्मिक मरणाधीन

 

पहले बात गलत लगे

पर आखिर विवश रहे

और सच स्वीकार करे

तब शोकार्त शोक टूटे

 

ये दुःखमय हाल देख

शायद दैवदेव भी द्रवे

पर दारूण दुःख घाव

कुछ अरसे बाद रुझे

 

तभी ज़रा शांत मन

खोई हिम्मत जुटाके

प्रियकी मधुर यादोमें

स्थिर ज़िंन्दगी जीये

 

पर कुछ दिलजलेका

नित्ययुक्त सा जीवन

तदपि उनकी हँसीमें

छिपा सिसकना सुने

 

शायद एकांत पलमें

मनप्यारेकी तसवीर

बारंबार एकटक देख

भावनामें रो लेते हो

 

और भाग्यसे सवाल

क्या था कसूर कहो

हमारा सुखचैन ऐसे

अचानक छीन लिया

 

जिसका जवाब नहीं

हाँ सोचो नियति है

कभी मिलन कराये

तो कभी दुर्भर दूरी

 

 

Background by John Torp 

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